. . . Best moral stories in hindi for class 10 | नैतिक कहानिया

Best moral stories in hindi for class 10 | नैतिक कहानिया

Moral stories in hindi for class 10


today I am sharing this blog of  moral stories in hindi for class 10  with all of you, which is quite valuable for every child. These moral stories will help a lot in understanding the society of children, so that they can become a good person. If you like this story, then do share it with other people.
आज मै आप सभी से नैतिक कहानियों का  यह  ब्लॉग साझा कर रहा हु जो काफी मुल्यवान है, |यह नैतिक कहानिए बच्चों के समाज को समझने मे काफी मदद करेगा ,जिससे वह एक अच्छा इंसान बन सके |अगर आपको यह कहानिया अच्छी लगे तो अन्य लोगों से जरूर साझा करे

      1. गोपी और जादू का खेल -      moral stories in hindi for class 10

एक लकड़ा था। उसका नाम था गोपी। उसकी माँ रोज सुबह उसे उठाती थी। गोपी ओ गोपी उठ जा स्कूल जाना हैं।

लेकिन गोपी आँख बंद किये हुए कहता है- बस पाँच मिनट में उठता हूँ। की कहानियाँ

उसकी माँ जब नहाने के लिए कहती, तो गोपी बोलता है- बस पाँच मिनट में नहाता हूँ।

माँ जब खाना खाने के लिए कहती तो वह बोलता- बस पाँच मिनट में खाता हूँ।

इस तरह पाँच मिनट करते- करते गोपी रोज देर से स्कूल पहुंचता, उसके अध्यापक समझाते - गोपी समय पर स्कूल आया करो।

लेकिन गोपी अपनी आदत के कारण कुछ नहीं सुनता था। कक्षा में भी वह अपना काम कभी समय पर नहीं करता था। दूसरे बच्चें अपना काम समाप्त कर के खेलने चले जाते थे, और गोपी वहीं बैठा रहता था।

एक दिन स्कूल में जादू का खेल दिखाया जाना था। अध्यापक ने बच्चों को सुबह दस बजे आने के लिए कहा था। सभी छात्र समय पर स्कूल पहुँच चुके थे, कुछ बच्चों को देर हो गयी थी, वे भागते - भागते स्कूल जा रहे थे। उस समय गोपी घर के बाहर खेल रहा था|

एक बच्चा बोला- गोपी, जल्दी चलो...जादू का खेल शुरू हो जाएगा।

गोपी ने कहा- तुमलोग चलो, में बस पाँच मिनट में आता हूँ। लेकिन पाँच मिनट बोलते - बोलते उसे देर हो गयी। 

जब गोपी स्कूल पहुँचा तो जादू का खेल समाप्त हो चुका था। सभी बच्चें जादू के खेल की बातें करते हुए लौट रहे थे। सभी बच्चे खुश थे, और गोपी उदास था।

फिर उसके अध्यापक ने कहा- गोपी उदास मत रहो, आज से तुम सुबह जल्दी उठो और सभी काम समय पर करो, फिर तुम्हें कभी उदास नहीं होना पड़ेगा।

अब गोपी की बारी- गोपी को उस दिन अपनी गलती समझ में आ गयी, उसके बाद गोपी सुबह जल्दी उठने लगा और वः अपना काम भी समय पर करने लगा। अगले साल जब स्कूल में जादू का खेल दिखाया गया तो गोपी समय पर स्कूल गया, आज वह सबसे पहली कतार में बैठा था, और जादू का खेल देखकर खुश था।

शिक्षा/Moral:- इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती हैं कि हमें सुबह जल्दी उठना चाहिए। अपना काम समय पर करना चाहिए। समय पर काम करने वाले हमेशा खुश रहते हैं।

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  2. मैना पक्षी और स्कूली बच्चे -           long moral stories in hindi for class 10


गाँव के पास एक विद्यालय थी। उस विद्यालय में गाँव के छोटे बच्चे पढ़ते थे। जब उनकी छुट्टी होती तो रास्ते मे एक जामुन के पेड़ के पास वे रुकते थे। उस पेड़ पर एक मैना ने अपना घोंसला बनाया था।

बच्चें मैना से कहते- सुनो मैना पक्षी हमें कुछ जामुन गिराओ। मैना बच्चों की आवाज सुनकर पके जामुन गिराती थी। बच्चे जामुन खाकर बहुत खुश होते थे।

एक दिन की बात हैं। मैना पक्षी कही दूर दाना चुनने चली गयी थी। वह वापस लौटते समय अपना रास्ता भूल गयी। मैना के घोंसला में उसके बच्चें बहुत चिंतित थे।

मैना के बच्चो ने- घोंसला के बाहर देखना चाहा, लेकिन वे जमीन पर गिर गए। “मैना के बच्चों को डर लग रहा था, कहीं कौआ उन्हें देख ना ले नहीं तो कौआ उन्हें मार डालेगा”।

उसी समय विद्यालय की छुट्टी हुयी और विद्यालय के बच्चें उस पेड़ के पास आये। उन्होंने मैना के बच्चो को देखा, वे समझ गए कि मैना आज पेड़ पर नहीं हैं। विद्यालय के बच्चो ने मैना के बच्चों को वापस उनके घोसलों में पहुंचा दिया। कुछ समय बाद मैना पक्षी वापस उस पेड़ में आ गयी।

मैना ने अपने बच्चों से उनका हाल पूछाउन्होंने बताया कि आज विद्यालय के बच्चों ने उसे घोसलें में सुरक्षित पहुँचाया। मैना ने उन्हें बहुत धन्यवाद दिया और अपने बच्चों को गले से लगा लिया।

शिशिक्षा/Moral:- दोस्तों इस कहानी से हमें सिख मिलती हैं कि कर भला तो हो भला। 

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    3. घास ,बकरी और भेडीया -          moral stories in hindi for class 10


गाँव के पास एक विद्यालय थी। उस विद्यालय में गाँव के छोटे बच्चे पढ़ते थे। जब उनकी छुट्टी होती तो रास्ते मे एक जामुन के पेड़ के पास वे रुकते थे। उस पेड़ पर एक मैना ने अपना घोंसला बनाया था।

बच्चें मैना से कहते- सुनो मैना पक्षी हमें कुछ जामुन गिराओ। मैना बच्चों की आवाज सुनकर पके जामुन गिराती थी। बच्चे जामुन खाकर बहुत खुश होते थे।

एक दिन की बात हैं। मैना पक्षी कही दूर दाना चुनने चली गयी थी। वह वापस लौटते समय अपना रास्ता भूल गयी। मैना के घोंसला में उसके बच्चें बहुत चिंतित थे।

मैना के बच्चो ने- घोंसला के बाहर देखना चाहा, लेकिन वे जमीन पर गिर गए। “मैना के बच्चों को डर लग रहा था, कहीं कौआ उन्हें देख ना ले नहीं तो कौआ उन्हें मार डालेगा”।

उसी समय विद्यालय की छुट्टी हुयी और विद्यालय के बच्चें उस पेड़ के पास आये। उन्होंने मैना के बच्चो को देखा, वे समझ गए कि मैना आज पेड़ पर नहीं हैं। विद्यालय के बच्चो ने मैना के बच्चों को वापस उनके घोसलों में पहुंचा दिया। कुछ समय बाद मैना पक्षी वापस उस पेड़ में आ गयी।

मैना ने अपने बच्चों से उनका हाल पूछाउन्होंने बताया कि आज विद्यालय के बच्चों ने उसे घोसलें में सुरक्षित पहुँचाया। मैना ने उन्हें बहुत धन्यवाद दिया और अपने बच्चों को गले से लगा लिया।

शिशिक्षा/Moral:- दोस्तों इस कहानी से हमें सिख मिलती हैं कि कर भला तो हो भला।

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4. साधू की झोपड़ी -         moral stories in hindi for class 10


एक गाँव के पास दो साधू अपनी अपनी झोपड़ियाँ बना कर रहते थे। दिन के वक्त वह दोनों गाँव जा कर भिक्षा मांगते और उसके बाद पूरा दिन पूजा-पाठ करते थे।

एक दिन भारी तूफान और आँधी आने के कारण उनकी झोपड़ियाँ जगह-जगह से टूट-फूट गयीं और बहुत हद तक बर्बाद हो गयीं।

पहला साधू यह सब देख कर दुखी हो गया|

पहला साधू बोला- हे ईश्वर ! तूने मेरे साथ यह अनर्थ क्यों किया। क्या मेरी भक्ति, तप, जप और पूजा का यही पुरस्कार है?

इस तरह वह पूरा दिन बड़बड़ाते हुए, अपना जी जलाते हुए वहीं एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

तभी वहाँ दूसरा साधू आ पहुंचा-उसने अपनी बर्बाद जोपड़ी देखी तो वह मुस्कुराने लगा और उसी वक्त ऊपरवाले का धन्यवाद करने लगा।

दूसरे साधु ने कहा कि-ऐसे भीषण तूफान में तो पक्के मकान भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं पर तूने तो मेरी आधी झोपड़ी बचा ली।

आज यह बात सिद्ध हो गयी की तू मेरी भक्ति से कितना प्रसन्न है और तेरी मुझ पर कितनी बड़ी कृपा है।

शिक्षा/Moral:- हर अच्छी बुरी घटना के दो पहलू होते हैं। बुरा निष्कर्ष निकालना या फिर अच्छा अर्थ निकालना यह दोनों ही आपके हाथ में है।

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5. चार व्यापारी मिऋ - 


गंगा नदी के किनारे कंचनपुर नामक एक गाँव बसा हुआ था। उस गाँव में अनेक तरह के काम - धाम करने वाले लोग रहते थे। उस गाँव में चार बहुत ही अच्छे मित्र रहते थे, उनका नाम गंगाधर, लीलाधर, मुकेश और संजय था। वे रुई का व्यापार करते थे।

एक बार उनके गोदामों में बहुत सारे चूहे रहने लगे। वे प्रतिदिन बहुत सारा रुई खराब कर देते थे। उन्हें रोज चूहो की वजह से रुई का बहुत नुकसान हो रहा था। एक दिन वे इसका कुछ उपाय ढूंढने के लिये सलाह करने आये।

गंगाधर बोला- मित्रों...चूहों ने हमारा बहुत नुकसान किया हैं। हमें इसका कोई उपाय सोचना चाहिये।

मुकेश ने कहा- हाँ.....यह सही बात हैं। में तो कहता हूँ कि चलो चूहों को पकड़ने वाले पिंजरा खरीद लेते हैं।

लीलाधर बोला- पिंजरा नहीं तो चूहों को मारने की दवाई ही खरीद लेते हैं। उससे चूहे मर जाएँगे।

संजय ने कहा- दोस्तों, जब चूहों को मारना ही हैं तो सबसे अच्छा हमें एक बिल्ली पाल लेनी चाहिये। बिल्ली चूहों को मार कर खा भी जायेगी और हमें कुछ खरीदना भी नहीं पड़ेगा।

बिल्ली पालने की बात सबको बहुत अच्छी लगी, उन्होंने एक बिल्ली पाल ली और उसका एक - एक पंजा आपस में बांट लिया।

गंगाधर ने आगे का दायाँ पंजा लिया।

लीलाधर ने आगे का बायाँ पंजा लिया।

पीछे का दायाँ पंजा मुकेश और,

बायाँ पंजा संजय ने लिया।

अब चारों बिल्ली के एक-एक पंजे की देखभाल करने लगे। बिल्ली रोज चूहों को खाने लगी। उनके गोदामों में चूहों की संख्या कम होने लगी, यह देख चारों मित्र बहुत खुश थे।

एक दिन बिल्ली के आगे के दायाँ पैर में कुछ चोट लग गयी, उस पैर की देखभाल गंगाधर कर रहा था। उसने बिल्ली के पैर में थोड़ा तेल लगाकर एक कपड़े से बांध दिया। बिल्ली को कुछ आराम हुआ, वह फिर चलने लगी।

रात के समय बिल्ली गोदामों में चूहे की तलाश कर रही थी, उसकी नजर एक चूहे पर गयी। बिल्ली ने उसे झपट्टा मारा, लेकिन वह चूहा भाग गया। अब बिल्ली उसका पीछा करने लगी, चूहा भागते - भागते एक जलते हुये दीपक के पास से गुजरा, बिल्ली भी उसका पीछा कर रही थी।

जैसे ही बिल्ली उस दीपक के पास से गुजरी तभी बिल्ली के पैर में जहाँ तेल और कपड़ा बंधा हुआ था, वहाँ पर आग ने पकड़ लिया। अब बिल्ली आग से छटपटा कर भागने लगी, वह घबराकर इधर से उधर भाग रही थी। उसके भागने से पूरे गोदाम में आग लग गयी।

उसी समय गंगाधर को यह बात पता चली- उसने तुरंत बिल्ली को बचा लिया, लेकिन गोदाम में रखी सारी रुई जल गयी। अब तीनों दोस्त गंगाधर पर आरोप लगाने लगे। उनका कहना था कि बिल्ली के जिस पंजे से आग लगी हैं वह गंगाधर का हैं।

इसलिए गंगाधर ही अपराधी हैं, उसे ही नुकसान की भरपाई करनी चाहिये। लेकिन गंगाधर ने इनकी बात मानने से मना कर दिया, अब चारों शिकायत लेकर गाँव के पंचायत पहुँचे।

पंचायत के लोगों ने इनकी बात सुनी, और फिर कहा- देखो, गंगाधर के हिस्से का जो पंजा था आग उसमें लगी थी। लेकिन अकेला पंजा तो नहीं चल सकता हैं। तुम तीनों के हिस्से के पंजा ने ही गंगाधर के हिस्से के पंजे को चलाया इसलिये नुकसान की भरपाई अकेले गंगाधर नहीं करेगा। वह अपराधी नहीं हैं। गलती तुम चारों की हैं। इसलिए नुकसान की भरपाई भी तुम चारों मिलकर करोगे। पंचायत के फैसले से सभी सहमत हो गये, फैसले से गंगाधर बहुत खुश था। 

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6. खेल - खेल में -         moral stories in hindi for class 10


एक बार की बात है एक लड़का जिसका उसकी माँ के सिवाए इस धरती पर कोई नही था। अपने रूम में बिस्तर पर लेटा हुआ अपने स्वर्गवासी पिता के बारे में सोच रहा था। अचानक उसके कमरे की खिड़की पर बिजली चमकी। वह घबराकर उठ गया। उसने देखा कि खिड़की के पास एक व्यक्ति हवा में उड़ रहा है। उस व्यक्ति को देख कर लड़का डर गया किन्तु उसने हिम्मत करके

उस व्यक्ति से कहा- “कौन है आप”

वह व्यक्ति खिड़की के पास आ कर बोला – ” डरोमत” में तुम्हारा पिता हूँ। तुम बहुत अच्छे लड़के हो। इसलिए मैं तुमसे मिलने आया हूँ। बचे ने अपने पिता को देखा तो वह बहुत खुश हुआ। काफी समय तक वे दोनों आपस में बात करते रहे। और जाते जाते उसके पिता ने उसे.....

एक जादुई छड़ी देते हुए कहा-

“ये जादू की छड़ी है। तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़कर दो बार घुमाओगे वह चीज गायब हो जाएगी। अगले ही दिन लड़का वह छड़ी अपने स्कूल ले गया।

वहां उसने मस्ती करना शुरू किया। लड़के ने स्कूल में भी टीचर की किताब गायब कर दी फिर कई बच्चों की रबर और पेंसिलें भी गायब कर दीं। किसी को भी पता न चला कि यह लड़के की छड़ी की करामात है।

जब वह घर पहुंचा तब भी उसकी शरारतें बंद नहीं हुईं। लड़के को इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था। किचन के दरवाजे के सामने एक कुर्सी रखी थी।

लड़के ने सोचा- क्यों न मैं इस कुर्सी को गायब कर दूं। जैसे ही उसने छड़ी घुमाई वैसे ही लड़के की मां किचन से बाहर निकलकर कुर्सी के सामने से गुजरी और कुर्सी की जगह उसकी मां गायब हो गई।

लड़का घबरा गया और रोने लगा। इतने में उसके सामने वह व्यक्ति आगया । लड़के ने अपने पिता को सारी बात बताई। व्यक्ति ने लड़के से कहा, मैं तुम्हारी मां को वापस ला सकता हूं, लेकिन उसके बाद मैं तुमसे ये जादू की छड़ी की वापस ले लूंगा।

लड़कारोते हुए बोला, आप जो भी चाहिए ले लो, लेकिन मुझे मेरी मां वापस ला दो। तब व्यक्तिने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते लड़के की मां वापस आ गई।

लड़के ने मुड़कर व्यक्ति का शुक्रिया कहना चाहा, लेकिन तब तक व्यक्तिबहुत दूर बादलों में जा चूका था। लड़का अपनी मां को वापस पाकर बहुत खुश हुआ और दौड़कर गले से लग गया।

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7. जादू की छड़ी -             moral stories in hindi for class 10


एक रात की बात है शालू अपने बिस्तर पर लेटी थी। अचानक उसके कमरे की खिडकी पर बिजली चमकी। शालू घबराकर उठ गई। उसने देखा कि खिडकी के पास एक बुढिया हवा मे उड़ रही थी।

बुढ़िया खिडकी के पास आइ और बोली- ``शालू तुम मुझे अच्छी लड़की हो। इसलिए मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ।'' शालू यह सुनकर बहुत खुश हुई।

बुढिया ने शालू को एक छड़ी देते हुए कहा- ``शालू ये जादू की छड़ी है। तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़ कर दो बार घुमाओगी वह चीज गायब हो जाएगी।'' अगले दिन सुबह शालू वह छड़ी अपने स्कूल ले गई। वहा उसने शैतानी करना शुरू किया।

उसने पहले अपने समने बैठी लड़की की किताब गायब कर दी फिर कइ बच्चों की रबर और पेंसिलें भी गायब कर दीं। किसी को भी पता न चला कि यह शालू की छड़ी की करामात है।

जब वह घर पहुँची तब भी उसकी शरारतें बंद नही हुई। शालू को इस खेल में बडा मजा आ रहा था। रसोई के दरवाजे के सामने एक कुरसी रखी ती।

उसने सोचा- ``क्यों न मै इस कुरसी को गायब कर दूँ। जैसे ही उसने छडी घुमाई वैसे ही शालू की माँ रसोइ से बाहर निकल कर कुरसी के सामने से गुजरीं और कुरसी की जगह शालू की माँ गायब हो गईं।

शालू बहुत घबरा गई और रोने लगी। इतने ही में उसके सामने वह बुढिया पकट हुई। शालू ने बुढिया को सारी बात बताई।

बुढिया ने शालू से कहा- `` मै तुम्हारी माँ को वापस ला सकती हू लेकिन उसके बाद मै तुमसे ये जादू की छडी वापस ले लूगी।''

शालू बोली ``तुम्हे जो भी चाहिए ले लो लेकिन मुझे मेरी माँ वापस ला दो।'' तब बुढिया ने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते शालू की माँ वापस आ गई।

शालू ने मुड़ कर बुढ़िया का शुक्रिया अदा करना चाहा लेकिन तब तक बुढ़िया बहुत दूर बादलों में जा चुकी थी। शालू अपनी माँ को वापस पाकर बहुत खुश हुई और दौडकर गले से लग गई। 

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8. राक्षस और राजकुमार -             stories in hindi for class 10


एक राजा की तीन बेटियां थीं। तीनों बेहद खूबसूरत थीं। सबसे बडी़ बेटी का नाम आहना उससे छोटी याना और सबसे छोटी का नाम सारा था। एक बार तीनों अपने राज्य के जंगल में घूमने निकलीं। अचानक तूफान आ गया। उनके साथ आया सुरक्षा दल इधर-उधर बिखर गया। वे तीनो जंगल में भटक गई थीं।

थोड़ी दूर चलने पर उन्हें एक महल दिखाई दिया। अंदर जाकर देखा तो वहां कोई नहीं था। उन्होंने वहां विश्राम किया और टेबल पर रखा भोजन खा लिया। सुबह होते ही सारा उस महल के बगीचे में घूमने निकल गई। सारा ने वहां गुलाब देखे और बिना कुछ सोचे उन्हें तोड़ लिया।

उसके फूल तोड़ते ही उस पौधे में से एक राक्षस बाहर आ गया, उसने सारा से कहा कि मैंने तुम्हें रहने के लिए घर और खाने के लिए भोजन दिया और तुमने मेरे ही पसंदीदा फूल तोड़ दिए। अब मैं तुम तीनों बहनों को मार डालूंगा।

सारा बहुत डर गई उसने विनती की, लेकिन राक्षस नहीं माना। फिर राक्षस ने एक शर्त रखी कि तुम्हारी बहनों को जाने दूंगा पर तुम्हें यहीं रुकना होगा। सारा ने यह शर्त मान ली और राक्षस के साथ रहने लगी।

राक्षस के अच्छे व्यवहार से धीरे-धीरे उनके बीच दोस्ती हो गई। एक दिन राक्षस ने सारा को उसके साथ शादी करने के लिए कहा। सारा न ही हां कर पाई और न ही मना। राक्षस ने इस बात के कारण कभी उस पर कोई दबाव नहीं डाला।

उस राछस के पास एक जादुई आइना था। एक बार सारा ने जादुई आईने में देखा कि उसके पिता की तबीयत ठीक नहीं है। वह रोने लगी। यह देख राक्षस ने उसे सात दिन के लिए घर जाने की इजाजत दे दी।

उस राछस की इजाजत लेके सारा अपने घर पहुंची। उसके पिता ने उसे देखा तो वह बहुत खुश हुए और सारा अपने परिवार के साथ खुश रहने लगी। उसके पिता की तबीयत भी ठीक हो गई।। सारा को पता ही नही चला कब सात दिन बीत गए। और फिर एक दिन सारा ने सपना देखा कि राक्षस बीमार है और उसे बुला रहा है।

सारा अगले ही दिन सब से विदा लेकर वापस राछस के पास पहुंची। वहां जाकर उसने देखा कि राक्षस जमीन पर पड़ा हुआ है। यह देख सारा रोते हुए उसके पास गई। उसे गले लगाकर बोली उठो मैं तुमसे प्यार करती हूं और तुमसे शादी करना चाहती हूं। यह सुनते ही राक्षस एक सुंदर राजकुमार में बदल गया। वह बोला कि मैं यही शब्द सुनने का इंतजार कर रहा था।

उसने बताया कि एक बुरी औरत ने उसे श्राप दिया था और कहा था कि जब तक उसे उसका प्यार नहीं मिल जाता वह इसी हाल में तड़पता रहेगा। इसके बाद राजकुमार और राजकुमारी ने शादी कर ली और खुशी-खुशी रहने लगे।

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9. सात बहने और गणेश जी - 


एक बार की बात है। सात बहनें थी। छः बहनें पूजा-पाठ करती थीं लेकिन सातवीं बहन नहीं।

एक बार गणेशजी ने सोचा मैं इन सात बहनों की परीक्षा करता हूँ। वे साधु के रूप में आए और दरवाजा खटखटाया।

पहली बहन से गणेशजी ने कहा- मेरे लिए खीर बना दो, मैं बड़ी दूर से आया हूँ। उसने मना कर दिया। ऐसे छः बहनों ने मना कर दिया।

लेकिन सातवीं बहन ने हाँ कह दी- उसने चावल बीनना शुरू किए और फिर खीर बनाना शुरू की।

अधपकी खीर उसने चख भी ली फिर साधु महाराज को खीर दी।

साधु ने कहा- तुम भी खीर खा लो।

सातवीं बहन ने कहा- मैंने तो खीर बनाते-बनाते ही खा ली है।

यह सुनते ही गणेशजी साधु से अपने पहले वाले रूप में आ गए

गणेशजी ने सातवीं बहन से कहा- मैं तुम्हें स्वर्ग ले जाऊँगा।

बहन ने कहा कि मैं अकेले स्वर्ग नहीं जाऊँगी। मेरी छः बहनों को भी ले चलिए।

गणेशजी खुश हुए और सबको स्वर्ग ले गए।

स्वर्ग में मजे से घूमने के बाद सभी बहने अपने घर वापिस आ गए और सभी खुश होकर एक साथ रहने लगे।

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10. चित्रकार और अपंग राजा -              moral stories in hindi for class 10


बहुत समय पहले की बात है किसी राज्य में एक राजा राज करता था जिसके केवल एक टांग और एक आँख थी उस राज्य की प्रजा बहुत ही खुशहाल और धनवान थी।

सब लोग एक साथ मिल कर ख़ुशी से जीवन यापन करते थे और अपने राजा का सम्मान करते थे क्योंकि उस राज्य का राजा एक बुद्धिमान और प्रतापी व्यक्ति था।

एक बार राजा के मन में यह विचार आया कि क्यों ना अपनी एक तस्वीर बनवाई जाए जो राजमहल में लगाई जा सके, फिर क्या था राजा ने अपने मंत्री को आदेश दिया कि देश और विदेश से महान चित्रकारों को बुलाया जाए।

राजा के आदेश पाकर देश और विदेश से कई महान चित्रकार राजा के दरबार में पहुंचे, राजा ने उन सभी से हाथ जोड़कर आग्रह किया कि उनकी एक बहुत ही सुन्दर तस्वीर बनाई जाए।

राजा के इस आदेश से सारे चित्रकार सोच में पड़ गए कि राजा तो पहले से ही विकलांग है तो इसकी तस्वीर को बहुत सुंदर कैसे बनाया जाए यह तो संभव ही नहीं है और अगर तस्वीर सुंदर नहीं बनी तो राजा गुस्सा होकर दंड देगा यह सोच कर सभी चित्रकारों ने राजा की तस्वीर बनाने से मना कर दिया तभी उन चित्रकारों की भीड़ में से एक हाथ ऊपर उठा और आवाज आई “मैं आपकी बहुत ही सुन्दर तस्वीर बनाऊंगा जो आपको निश्चित ही पसंद आएगी”।

चित्रकार ने राजा की आज्ञा लेकर तस्वीर बनाना शुरू किया काफी देर बाद उसने एक तस्वीर तैयार की। राजा उस तस्वीर को देख कर बहुत प्रसन्न हुआ यह देख कर वहा खड़े सारे चित्रकारों ने अपने दांतो तले उंगली दबा ली उस चित्रकार ने एक ऐसी तस्वीर बनाई थी जिसमें राजा एक टांग को मोड़कर जमीन पर बैठा हुआ था और एक आँख बंद कर अपने शिकार पर निशाना साध रहा था|

राजा यह देखकर बहुत प्रसन्न हुआ कि चित्रकार ने उसकी कमजोरी को छिपा कर बहुत ही चतुराई से एक सुंदर तस्वीर बनाई राजा ने खुशहोकर उस चित्रकार को बहुत सारा धन दिया।

शिक्षा/Moral:- तो बच्चों क्यों ना हम भी चित्रकार की तरह दूसरों की कमजोरियों को नजर अंदाज कर उनकी अच्छाइयों पर ही ध्यान दें। जरा सोचिए अगर हम दूसरों की कमियों का पर्दा डालें और बुराइयो को नज़रंदाज़ करे तो एक दिन दुनिया की सारी बुराईयाँ ही ख़त्म हो जाएगी और सिर्फ अच्छाइयाँ ही रह जाएगी।         


👨   Summury - 

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