. . . Shekh chilli ki kahaniyan | शेख चिल्ली की मजेदार कहानियां

Shekh chilli ki kahaniyan | शेख चिल्ली की मजेदार कहानियां

Shekh chilli ki kahaniyan.                                        
Shekh chilli ki kahaniyan
                                                                          1. शेखचिल्ली की चिट्ठी - ।    (Shekh chilli ki kahaniyan)                                                                                                                             एक बार शेख चिल्ली के भाई बीमार पड़ गए। इस बात की खबर पाते ही शेख चिल्ली नें अपनें भाई की खैरियत पूछने के लिए चिट्ठी लिखने की सोची।
पूर्व काल में डाक व्यवस्था और फोन जैसी आधुनिक सुविधाएं थी नहीं तो खत और चिट्ठियाँ मुसाफिर (लोगों) के हाथों ही भिजवाई जाती थीं। शेख चिल्ली नें अपनें गाँव में नाई से चिट्ठी पहुंचानें को कहा, पर उनके गाँव का नाई (चिट्ठियाँ पहुंचाने वाला) पहले से ही बीमार चल रहा था सो उसने मना कर दिया। गाँव में फसल पकी होने के कारण दूसरे अन्य नौकर या मुसाफिर का मिलना भी मुश्किल हो गया।
तब शेख चिल्ली नें सोचा की मै खुद ही जा कर भाई जान को चिट्ठी दे आता हूँ।
अगले ही दिन सुबह-सुबह शेख चिल्ली अपने भाई के घर रवाना हो गए। शाम तक वह उसके घर भी पहुँच गए।
घर का दरवाज़ा खटखटाने पर उनके बीमार भाई तुरंत बाहर आए। शेख चिल्ली नें उन्हे चिट्ठी पकड़ाई और उल्टे पाँव वापसअपने गाँव की और लौटने लगे।
तभी उनके भाई उनके पीछे दौड़े और उन्हे रोक कर बोले –
तू इतनी दूर से आया है तो घर में तो आ मुझ से गले तो मिल। नाराज़ है क्या मुझ से?
यह बोल कर भाई साहब शेख चिल्ली को गले लगाने आगे बढ़े।
तभी शेख चिल्ली  नें अपने भाई से दूर हटते हुए कहा कि-
मै आप से नाराज़ बिलकुल नहीं हूँ, पर यह तो मुझे चिट्ठी पहुंचाने वाला “नाई” मिल नहीं रहा था इसलिए आप की खैर खबर पूछने की चिट्ठी देने मुझे खुद आप के गाँव तक यहाँ आना पड़ा।
शेख चिल्ली के भाई ने समझाया कि अब तुम आ ही गए हो तो दो चार दिन रुक कर जाओ। इस बात पर शेख चिल्ली का पारा चढ़ गया। उन्होने मुंह टेढ़ा करते हुए कहा, “भाईजान आप तो अजीब इन्सान है। आप को यह बात समझ नहीं आती की मै यहाँ नाई का फर्ज़ अदा करने आया हूँ। मुझे आप से मिलने आना होता तो मै खुद चला आता, नाई के बदले थोड़े ही आता।                                                                                                                               2. शेखचिल्ली चले लकड़ियों को  काटने-।  (Shekh chilli ki kahaniyan)                                                                                                          एक बार शेख चिल्ली अपने मित्र के साथ जंगल में लकड़ियाँ कांटने गए। एक बड़ा सा पेड़ देख कर वह दोनों दोस्त उस पर लकड़ियाँ काटने के लिए चढ़ गए।
शेख चिल्ली अब लकड़ियाँ काटते-काटते लगे अपनी सोच के घोड़े दौड़ने। उन्होने सोचा कि मै इस जंगल से ढेर सारी लकड़ियाँ काटूँगा। उन लकड़ियों को बाज़ार में अच्छे दामों में बेचूंगा। इस तरह मुझे काफी धन-लाभ होगा।
इस काम से मै कुछ ही समय में अमीर बन जाऊंगा। फिर लकड़ियाँ काटने के लिए ढेर सारे नौकर रख लूँगा। काटी हुई लकड़ियों से फर्नीचर का बिज़नस शुरू करूंगा।
कुछ ही दिनों में मै इतना समृद्ध व्यापारी बन जाऊंगा की नगर का राजा मुझ से राजकुमारी का विवाह करवाने के लिए खुद सामने से राज़ी हो जाएगा।
शादी के बाद हम घूमने जायेंगे और एक सुन्दर सी बागीचे में राजकुमारी अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाएंगी|
ख़यालों में खोये हुए शेख चिल्ली ऐसा सोचते-सोचते पेड़ की डाल छोड़ कर सचमुच राजकुमारी का हाथ थामने के लिए अपने हाथ आगे बढाने लगते है|
तभी अचानक उनका संतुलन बिगड़ जाता है और वो धड़ाम से नीचे ज़मीन पर गिर पड़ते है।
ऊंचाई से गिरने पर शेख चिल्ली के पैर में चोट लग जाती है और साथ-साथ उनके बिना सिर-पैर के खयाली सपनें भी टूट कर बिखर जाते हैं।                                                                                                                                            3. शेखचिल्ली के ख्याली पुलाव -। (Shekh chilli ki kahaniyan)                                                                                                                       एक दिन सुबह-सुबह शेख चिल्ली बाज़ार पहुँच गए। बाज़ार से उन्होने अंडे खरीदे और उन अंडों को एक टोकरी में भर कर अपने सिर पर रख लिया, फिर वह घर की ओर जाने लगे।
घर जाते-जाते उन्हे खयाल आया कि अगर इन अंडों से बच्चे निकलें तो मेरे पास ढेर सारी मुर्गियाँ होंगी। वह सब मुर्गियाँ ढेर सारे अंडे देंगी। उन अंडों को बाज़ार में बैच कर मै धनवान बन जाऊंगा।
अमीर बन जाने के बाद मै एक नौकर रखूँगा जो मेरे लिए शॉपिंग कर लाएगा। उसके बाद में अपनें लिए एक महल जैसा आलीशान घर बनवाऊंगा। उस बड़े से घर में हर प्रकार की भव्य सुख-सुविधा होंगी।
भोजन करने के लिए, आराम करने के लिए और बैठने के लिए उसमें अलग-अलग कमरे होंगे। घर सजा लेने के बाद मैं एक गुणवान, रूपवान और धनवान लड़की से शादी करूंगा।
साथ ही अपनी पत्नी के लिए भी एक नौकर रखूँगा और उसके लिए अच्छे-अच्छे कपड़े, गहने वगैरह ख़रीदूँगा। शादी के बाद मेरे 5-6 बच्चे होंगे, बच्चों को में खूब लाड़ प्यार से बड़ा करूंगा और फिर उनके बड़े हो जाने के बाद उनकी शादी करवा दूंगा| फिर उनके बच्चे होंगे। फिर में अपने पोतों के साथ खुशी-खुशी खेलूँगा।
शेख चिल्ली अपने ख़यालों में लहराते सोचते चले जा रहे थे तभी उनके पैर पर ठोकर लगी और सिर पर रखी हुई अंडों की टोकरी धड़ाम से ज़मीन पर आ गिरी।
अंडों की टोकरी ज़मीन पर गिरते ही सारे अंडे फूट कर बरबाद हो गए। अंडों के फूटने के साथ साथ शेख चिल्ली के खयाली पुलाव जैसे सपनें भी टूट कर चूर-चूर हो गए।                                                                                                4. कुवें में पजामा -।      (Shekh chilli ki kahaniyan)                                                                                                                                  एक दिन की बात है. शेखचिल्ली की माँ ने सारे कपडे धोकर सूखने के लिए बाहर डाल दी थी. कपड़े बाहर आकर वह घर के कामों में व्यस्त हो गयी. उधर शेखचिल्ली आराम से चारपाई पर लेटे – लेटे सपनों की दुनिया में खोया हुआ था.
बाहर धीमी गति से चल रही हवा अब थोड़ी तेज गति से चलने लगी थी. देखते ही देखते हवा ने अंधड़ का विकराल रूप धारण कर लिया. धूल का इतना बड़ा बबंडर उठा कि कुछ भी देखना मुहाल हो गया. आस –पड़ोस के लोग तेजी से अपने अपने घरों की ओर भागे. शेखचिल्ली भी अपनी माँ के साथ अपने घर में बंद हो गया.
शेखचिल्ली की माँ को अचानक याद आया कि उसने सारे कपडे तो सूखने के लिए बाहर डाल रखे हैं.उसने खिड़की की झिर्री से देखा तो सारे कपडे उस अंधड़ में उड़ चुके थे.
जब अंधड़ थोडा शांत हुआ तो वह अपने कपड़ों को ढूंढने घर से बाहर निकली. गाँव के अन्य लोग भी अपने अपने सामान ढूंढने के लिए इधर –उधर भटक रहे थे. कुछ देर इधर –उधर ढूंढने के बाद उसको अपने सारे कपडे मिल गए थे.
जब वह घर वापस आयी तो चारपाई पर बैठे शेखचिल्ली को देखकर उदास स्वर में बोली – “बेटा!
अंधड़ में उड़े सारे कपडे तो मिल गए सिर्फ तुम्हारा पजामा नहीं मिला. ना जाने कैसे उड़कर उस कुएँ में जा गिरा. जाओ जाकर अपने पायजामे को उस कुएँ से निकाल लो.” ।                                                                                                                                                                               5. बुरा सपना - ।   (Shekh chilli ki kahaniyan)                                                                                                                                            बेटा शेख क्या तुमने दुबारा वही सपना देखा?'' शेख चिल्ली की चिंतित मां ने उससे एक सुबह पूछा। तुम पूरी रात बेचैन रहे और करवटें बदलते रहे।
शेख चिल्ली ने अपना सिर हिलाया और फिर अपनी बाहों को अम्मी के गले में डाला। अम्मी ही तो उसका पूरा परिवार थीं। आज मैं तुम्हें हकीमजी के पास ले चलूंगी अम्मी ने कहा। '' इंशाअल्लाह वो तुम्हारे इन खराब सपनों का खात्मा कर देंगे। ''
हकीम ने बड़े धैर्य से शेख चिल्ली की कहानी को सुना। कई रातों से शेख चिल्ली को एक बुरा सपना आ रहा था जिसमें वो खुद एक चूहा होता था और गांव की सारी बिल्लियां उसका पीछा कर रही होती थीं!. जागने के बाद भी बड़ी मुश्किल से ही शेख चिल्ली अपने आपको यह समझा पाता था कि वो एक चूहा नहीं बल्कि एक लड़का है।
''मेरे बच्चे को यह तकलीफ क्यों है?'' शेख की मां ने हकीम से पूछा। '' जब वो छोटा था तो एक जंगली बिल्ली ने मेरे बचाने से पहले उसे जोर से नोचा वो उसी सपने को बार-बार देखता है?''
''शायद हकीम ने कहा। '' पर आप इसकी ज्यादा परवाह न करें। खराब सपनों की बीमारी जल्दी ही ठीक हो जाएगी। बेटा शेख आज से हर शाम को तुम मेरे पास दवा के लिए आना। और यह मत भूलना कि तुम एक चूहा नहीं बल्कि एक खूबसूरत नौजवान हो। '' यह सुनकर शेख का चेहरा मुस्कान से खिल उठा। हर शाम हकीम बिना बाप के इस लड़के से कोई एक घंटा बातचीत करते थे।
फिर उसे कोई अहानिकारक दवाई देकर घर भेज देते जिससे कि शेख को रात को अच्छी नींद आए।
धीरे- धीरे शेख चिल्ली और हकीम अच्छे दोस्त बन गए। हकीम ने शेख को अच्छी सेहत और साफ-सफाई के बारे में सरल बातें बतायीं।
बेटा शेख ने एक शाम को कहा-अगर मेरा एक कान गिर जाए तो क्या होगा?''
शेख ने हकीम के बड़े-बड़े कानों को घूरते हुए कहा- ''हकीमजी तब आप आधे बहरे हो जाएंगे।
''ठीक फर्माया हकीमजी ने कहा- अगर मेरा दूसरा भी कान गिर जाए तो?''
हकीमजी शेख ने कहा- ''तो फिर आप अंधे हो जाएंगे हकीमजी शेख ने कहा।
घबराए हुए हकीमजी ने पूछा- ''अंधा?''
शेख ने उत्तर दिया-हां। अगर आपके कान नहीं होंगे तो फिर क्या आपका चश्मा नहीं गिरेगा?''
हकीमजी यह सुनकर ठहाका मार कर हंसे। '' तुम ठीक कहते हो शेख बेटा उन्होंने कहा। '' इसके बारे में तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था!''
धीरे- धीरे शेख के खराब सपने बंद हो गए कि वो एक चूहा है इस बात की सपने में उसने कल्पना करनी बंद कर दी। एक दिन हकीम का एकपुराना दोस्त उनसे मिलने के लिए आया। शेख से बाजार से. कुछ गर्म जलेबियां लाने के लिए कहा गया। वो बस निकल ही रहा था कि उसे कुछ फीट की दूरी पर एक बड़ी बिल्ली दिखाई दी। '' हकीमजी मुझे बचाइए!'' शेख हकीमजी के पीछे छिपकर गिड़गिड़ाया।
मेरे बेटे अब तुम चूहा नहीं हो। क्या तुम्हें यह पता नहीं है? मुझे अच्छी तरह पता है हकीमजी शेख की अभी भी डर लग रहा था। '' पर क्या बिल्ली को यह बात किसी ने बताई है?'' अपनी मुस्कुराहट को दबाते हुए हकीम ने बिल्ली को भगा दिया। उसके बाद शेख को दिलासा दिलाने के बाद उन्होंने उसे जलेबियां लेने के लिए भेजा।
''मैं इस लड़के के पिता को अच्छी तरह जानता था हकीमजी के मेहमान ने शेख चिल्ली के बारे में कुछ सुनने के बाद कहा। मैं उसके घर जाकर उसकी मां से दुआ-सलाम करना चाहूंगा। ''
हकीमजी ने कहा- ''शेख आपको अपने घर ले जाएगा''। कुछ करारी जलेबी खाने के बाद और कहवा पीने के बाद शेख और मेहमान शेख के घर की ओर चले।
''क्या यह सड़क सीधे तुम्हारे घर को जाती है?''
शेख ने कहा- ''नहीं ''
मेहमान को कुछ आश्चर्य हुआ और उन्होंने कहा-मुझे लगा यह जाती होगी।
शेख ने कहा- ''नहीं यह सड़क मेरे घर नहीं जाती है।
मेहमान ने पूछा- ''फिर वो कहां जाती है ।
शेख ने शांत भाव में उत्तर दिया- ''वो कहीं भी नहीं जाती है।
मेहमान उसकी ओर घूरने लगा और कहा-'' बेटा इससे तुम्हारा क्या मतलब है?''
'जनाब शेख ने शांति से कहा- '' सड़क भला कैसे जा सकती है? उसके पैर तो होते नहीं है। सड़क तो एक बेजान चीज है। वो जहां पर है वहीं पड़ी रहती है। परंतु हम इस सड़क से मेरे घर तक जा सकते हैं। आपकी मेहमाननवाजी करके मुझे और अम्मी को बहुत खुशी होगी। ''
शेख की निष्कपटता से उस उमर दराज इंसान का दिल पसीज गया। कुछ सालों बाद शेख चिल्ली उसका दामाद बना!                                                                                                                                                                         और मजेदार कहानियों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें -।                                                                                     <प्रेरणादायक कहानियां।                                                 <

Post a Comment

0 Comments