. . . 7 Hindi short stories with moral for kids

7 Hindi short stories with moral for kids

7 Hindi short stories with moral for kids -                                                                                1. लोमड़ी और बकरी                                   (    Hindi short stories with            moral  for  kids ).   

                                                                                                             एक समय की बात है, एक लोमड़ी घूमते-घूमते एक कुएं के पास पहुंच गई। कुएं की जगत नहीं थी। उधर, लोमड़ी ने भी इस और ध्यान नहीं दिया। परिणाम यह हुआ कि बेचारी लोमड़ी कुएं में गिर गई।
कुआं अधिक गहरा तो नहीं था, परंतु फिर भी लोमड़ी के लिए उससे बाहर निकलना सम्भव नहीं था। लोमड़ी अपनी पूरी शक्ति लगाकर कुएं से बाहर आने के लिए उछल रही थी, परंतु उसे सफलता नहीं मिल रही थी। अंत में लोमड़ी थक गई और निराश होकर एकटक ऊपर देखने लगी कि शायद उसे कोई सहायता मिल जाए।
लोमड़ी का भाग्य देखिए, तभी कुएं के पास से एक बकरी गुजरी। उसके कुएं के भीतर झांका तो लोमड़ी को वहां देखकर हैरान रह गई।
बकरी बोली- "नमस्ते, लोमड़ी जी! आप यह कुएं में क्या कर रही हो?"
लोमड़ी ने उत्तर दिया- "नमस्ते, बकरी जी! मुझे यहां कुएं में बहुत मजा आ रहा है।"
बकरी बोली- अच्छा! बहुत प्रसन्नता हुई यह जानकर। "आखिर बात क्या है?"
लोमड़ी बड़ी चतुरता से बोली- "यहां की घास अत्यन्त स्वादिष्ट है।"
बकरी आश्चर्य से बोली- "मगर तुम कब से घास खाने लगी हो?
”तुम्हारा कहना ठीक है। मैं घास नहीं खाती, मगर यहां की घास इतनी स्वादिष्ट है कि एक बार खा लेने के बाद बार बार घास ही खाने को जी करता है। तुम भी क्यों नहीं आ जाती हो?“
बकरी के मुंह में पानी भर आया- धन्यवाद!"बकरी कहने लगी मैं भी थोड़ी घास खाऊंगी।“
अगले ही क्षण बकरी कुएं में कूद गई। मगर जैसे ही बकरी कुएं के भीतर पहुंची लोमड़ी बकरी की पीठ पर चढ़कर ऊपर उछली और कुएं से बाहर निकल गई।
”वाह! बकरी जी। अब आप जी भर कर घास खाइए, मैं तो चली।“
इस प्रकार वह चतुर लोमड़ी बकरी का सहारा लेकर खुद तो कुएं से बाहर आ गई लेकिन बकरी को कुएं में छोड़ दिया।
शिक्षा/Moral:-हर किसी पर आंख मूंदकर विश्वास न करो।                                                                                                  2.मेंढ़क और सांढ -                    (Hindi short stories with moral for kids ).     
                                                                                                                                      यह किसी तालाब के किनारे की घटना है। एम मेंढ़क का बच्चा पहली बार पानी से बाहर आया। तालाब के कुछ दूर पर भीमकाय सांड़ घास चर रहा था।
मेंढ़क के बच्चे ने तो कभी भी इतना भयानक एवं भीमकाय जानवर नहीं देखा था। बेचारा समझ नहीं पर रहा था कि यह है क्या?
वह उल्टे पैरों भय से कांपता हुआ घर आया। घर पहुंच कर अपनी मां से लिपट गया और हांफता-हांफता हुआ कहने लगा- ”मां, मैने अभी अभी तालाब से बाहर एक बहुत बड़ा जानवर देखा है।“
मां ने बच्चे को गोद में झुलाते हुए पूछा- "कैसा था देखने में वह जानवर?
मेंढ़क का बच्चा बोला- "उसका वजन बताना तो मेरे लिए कठिन है, मगर समझ लो कि उसके चार पैर लम्बे-लम्बे थे। एक पूंछ थी, दो बड़ी-बड़ी आंखें। सिर से दो नुकीली भाले जैसी दो चीजें निकली पड़ी थी।
मेंढ़क की मां ने भी कभी तालाब से बाहर कदम नहीं रखा था, इसलिए वह भी ठीक से समझ नहीं पा रही थी कि आखिर वह कौन से जानवर हो सकता है? उसे यह सुनकर कुछ अपमान भी महसूस हुआ कि उसका बेटा उसके आकार को उससे भी बड़ा बता रहा है, जबकि वह अपने से बड़ा किसी को समझती ही नहीं थी। इसलिए उसने जोर से सांस खींचीऔर...
अपना शरीर फुलाते हुए बोली- ”क्या इतना बड़ा था," जितनी मैं हूं?
मेंढ़क का बच्चा कांपते हुए चिल्लाया- अरे नहीं मां, वह तो तुमसे बहुत अधिक बड़ा था। इस बार मेंढ़क की मां ने अपने फेफड़ों में ढेर सारी हवा भरी...
और आशा भरे स्वर में बोली- ”अब देखो! क्या अब भी वह मुझसे बड़ा लगता था?“
मेंढ़क का बच्चा बोला- "नहीं मां, तुम तो उसके आगे कुछ भी नहीं हो।
मेंढ़क की मां ने ये सुनते ही- उसकी मां के लिए यह बात एक चुनौती बन गई। वह अपने फेफड़ों में जबरदस्ती हवा भर कर फूलने का प्रयत्न करने लगी, मगर आखिर वह कितना फूलती।
एक समय आया जब उसका पेट किसी गुब्बारे की भांति फट गया।
शिक्षा/Moral:-घमंडी व्यक्ति का सिर सदैव नीचा होता है।                                                                                                   3. किसी कार्य को करने का अंजाम -।        ( Hindi short stories with moral for kids ).                                                                                               एक कंजूस महिला की यह आदत थी कि जैसे ही मुर्गे ने भोर में बांग लगाई- ‘कुंकडू-कूं और उसने अपनी नौकरानियों को उनके बिस्तरों से उठाना शुरू कर दिया।
नौकरानियां जवान मगर काहिल थी। उन्हें इस तरह अपनी मालकिन द्वारा गहरी नींद से उठाया जाना बिल्कुल पंसद नहीं था। वे चाहती थीं कि किसी प्रकार इस समस्या का हल निकल आए।
वह मुर्गा उनके लिए सबसे अधिक चिंता का विषय था। चाहे गरमी हो या बरसात, जाड़ा हो या बसन्त, बेरोकटोक सूर्य की निर्मल किरणें धरती पर पड़ते ही वह बांग देना शुरू कर देता था।
उसकी बांग की आवाज सुनकर वह कंजूस महिला खुद तो उठ ही जाती, साथ ही गहरी नींद सोती हुई अपनी नौकरानियों को भी उठा देती।
”यह सब उस मुर्गे के कारण होता है। उसकी वजह से ही हमारी नींद में खलल पड़ती है। हमारी इस समस्या का हल यही है कि हम उस मुर्गे को ही जान से मार दें।“ उनमें से एक नौकरानी ने अपनी राय दी।
उसकी बात सुनकर सभी नौकरानियां काफी खुश हुई। उन्होंने मुर्गे को मारने की एक योजना भी बनाई।
एक दिन मौका पाकर उन्होंने मुर्गे को पकड़ा और एकांत में ले जाकर उसकी गरदन ऐंठ कर उसे जान से मार दिया।
अब वे सभी यह सोचकर प्रसन्न थीं कि न तो मुर्गा भोर में बांग देगा और न ही मालकिन उठकर उन्हें जगाएगी। इस प्रकार उन्हें सुबह देर तक सोए रहने का अवसर प्राप्त हो जाएगा।
मगर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। अब मालकिन के पास चूंकि सही समय जानने का कोई साधन नहीं था, इसलिए वह सूर्य निकलने के बहुत पहले या कभी कभी आधी रात को ही उठ बैठती और साथ ही अपनी नौकरानियों को भी उठा देती।
नौकरानियों ने अपनी समस्या के हल के लिए मुर्गे को जान से मारा था, मगर हाय रे भाग्य! इससे उनकी समस्या बजाय घटने के और बढ़ गई।
शिक्षा/Moral:-किसी कार्य को करने से पहले उसका अंजाम पहले सोचो                                                                                                                                                         4 . नांद (चरनी) में कुतां।                                (Hindi short stories with moral for kids ).     
                                                                                                     किसी गांव में एक कुत्ता रहता था। वह झगड़ालू स्वभाव का था। एक दिन की घटना है कि वह एक अस्तबल में घुस गया और चारे की एक नांद (चरनी) पर चढ़ कर बैठ गया।
उसे वह स्थान इतना पंसद आया कि वह दिन भर वहीं लेटा रहा। उधर, जब घोड़ों को भूख लगी तो वे चारा खाने के लिए नांद की ओर आए।
मगर वह कुत्ता किसी घोड़े को नांद के पास फटकने ही नहीं देता था।
वह हरेक घोड़े पर भौंकता हुआ दौड़ता। बेचारे घोड़े अपना भोजन नहीं कर पर रहे थे। चूंकि चारा कुत्ते का भी भोजन नहीं था|
इसलिए हुआ यह कि कुत्ता न तो खुद भोजन खा रहा था और न ही किसी घोड़े को खाने दे रहा था।
नतीजा यह हुआ कि स्वयं वह तथा घोड़े भूखे ही रह गए।
शिक्षा/Moral:-इस कहानी से ये सीख मिलती है कि किसी के हक पर जबरदस्ती कब्जा न करो।                                                                                                                                    5. शिकारी खुद शिकार बना                      (Hindi short stories with moral for kids ).                                                                                              एक बार एक शिकारी किसी घने जंगल से होकर गुजर रहा था। उसके पास बंदूक भी थी।
जब वह जंगल के भीतर गया तो उसने पेड़ की एक डाल पर एक कबूतर बैठा देखा।
शिकारी ने- अपनी बंदूक से कबूतर का निशाना लिया और बंदूक का घोड़ा दबाने ही वाला था कि कहीं पीछे से एक सांप आया और उसे डस लिया।
सांप की वजह से- शिकारी अपने शिकार पर गोली नहीं चला सका और नीचे गिर पड़ा। सांप के विष का प्रभाव इतना तेज था कि उसका शरीर नीला पड़ने लगा। वह जमीन पर लोटने लगा। उसके मुंह से झाग निकलने लगे।
मरते समय शिकारी ने सोचा- ‘सांप ने मेरे साथ वही किया, जो मैं उस मासूम कबूतर के साथ करना चाहता था।’
शिक्षा/Moral:-दूसरों का बुरा करने वाला स्वयं भी विपत्ति में फंसता है।                                                                                        6. एक ग़लत इच्छा।                              (Hindi short stories with moral for kids ).     
                                                                                                  एक बार एक मधुमक्खी ने एक बरतन में शहद इकटृा किया और ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए उनके समक्ष प्रस्तुत किया।
ईश्वर उस भेंट से बहुत प्रसन्न हुए और मधुमक्खी से बोले कि वह जो चाहे इच्छा करे, उसे पूरा किया जाएगा।
मधुमक्खी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुई और बोली-”हे सर्वशक्तिमान ईश्वर, यदि आप सचमुच मुझसे प्रसन्न हैं तो मुझे यह वरदान दें कि मैं जिसे भी डंक मारूं, वह दर्द से तड़प उठे।
ईश्वर यह सुनकर बहुत क्रोधित हुए- ”क्या इसके अतिरिक्त तुम्हारी अन्य कोई इच्छा नहीं है। ठीक है, मैंने वादा किया है कि तुम्हारी इच्छा पूरी करूंगा, परंतु एक शर्त है।
मधुमक्खी से ईश्वर ने फिर कहा- वह यह कि तुम जिसे डंक मारोगी उसे तो बहुत दर्द होगा, परंतु तुम भी तुरंत मर जाओगी।"
दूसरे ही क्षण ईश्वर वहां से चले गए।
शिक्षा/Moral:-जो दूसरों का बुरा चाहते हैं, उनका भी बुरा ही होता है।                                                                              7. हिरण का बच्चा और बारहसिंगा।                  (Hindi short stories with moral for kids ) .   
                                                                                        एक दिन एक हिरन का बच्चा तथा एक बारहसिंगा दोनों किसी जंगल में एक साथ चर रहे थे। अचानक शिकारी कुत्तों का एक झुंड उनसे कुछ दूरी पर गुजरा।
बारहसिंगा तुरंत झाडि़यों के पीछे छिप गया और हिरन के बच्चे से भी ऐसा ही करने लिए कहा। जब शिकारी कुत्ते चले गए तो....
हिरन के बच्चे ने बहुत भोलेपन से कहा- ”चाचा, आखिर तुम इनसे इतने भयभीत क्यों थे?
अगर तुम उनसे लड़ने भी लगो तो तुम्हारे पराजित हो जाने की संभावनाएं बहुत कम हैं। ईश्वर की दया से तुम्हारे सींग नुकील हैं। तुम्हारे लम्बे-लम्बे पैर हैं।
चाहो तो दौड़ में उन्हें पछाड़ सकते हो। तुम्हारा शरीर भी कई गुना बड़ा है। फिर भी तुम इतने भयभीत हो।“
बारहसिंगे ने हिरन के बच्चे की बात ध्यान से सुनी और बोला- ”देखो लड़के, जो तुम कह रहे हो, वह बिल्कुल सच है। मैं भी ऐसा ही सोचता हूं,
बारहसिंगा ने फिर कहा- मगर सत्य तो यह है कि हममें से जब भी कोई इन शिकारी कुत्तों के चुगंल में फंसा है, वह कभी जीवित नहीं बचा है।
यही वह भय है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आया है। पीढि़यों पुराना यह भय हमारी नसों में भर गया है, हमारी प्रतिक्रियाओं में प्रतिबिम्ब्ति होता है।
यही कारण है कि इन जंगली जानवरों के सामने आते ही हम होशियार हो जाते हैं और अपने बचाव का प्रयत्न करते हैं।"
शिक्षा/Moral:- कई बार हम शक्तिशाली होकर भी भयभीत रहते हैं, ऐसा आनुवंशिकता के कारण होता है।

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