. . . 7 Best moral stories in hindi for kids

7 Best moral stories in hindi for kids

हेलो दोस्तों आज हम आपको 7 सबसे अच्छी प्रेरणादायक कहानियों के बारे में बताने जा रहे हैं,  जिससे आपको एक बेहतर इंसान बनने में काफी मदद करेगा । आशा है कि आपको यह कहानियां पसंद आएगी ।                                                1. चूहा और भगवान - ।    
7 Best moral stories in hindi for kids
                                                                                                                        एक बार की बात है.एक चूहा था.एक दिन उसने सोचा की चूहा होना बहुत गलत बात है,क्योंकि हमेशा बिल्लियों से खतरा रहता है और बोलने लगा की काश मैं बिल्ली होता. यह सुनकर भगवान को चूहे पर दया आ गयी और भगवान ने उसे बिल्ली बना दिया. बिल्ली बनने के बाद उसे कुत्तो से डर लगने लगा.
चूहा फिर सोचने लगा- काश मैं कुत्ता होता तो मैं कही भी निर्भीक होकर घूम सकता. भगवान ने उसे कुत्ता बना दिया. कुत्ता बनने के बाद वह दूर-दूर तक खूब घूमा.
एक दिन वह कुत्ता जंगल में चला गया, तो शेर उसके पीछे पड़ गया. वह किसी तरह अपनी जान-बचाकर वहा से निकला और.....
तब वह कुत्ता फिर बोला- काश मैं शेर होता तो मैं बिना किसी डर के जंगल में घूमता रहता.
भगवान ने उसकी कही हुई बात सुनी-उसे शेर भी बना दिया. वह अब जंगल में जाकर रहने लगा. वह पूरा जंगल घूमता रहता और वह बहुत ही खुश था, जब वह यह देखता की जंगल के सारे जानवर उससे डरते है.
एक दिन उस जंगल में एक शिकारी आ गया. वह शिकारी उस शेर को मारने के लिए तीर चलाने लगा. उसे उन तीरों से बचने के लिए गुफा की ओर भागना पड़ा और वहा छुपना पड़ा.
फिर उस शेर ने सोचा- यह भी कोई जिंदगी हुई. काश में मनुष्य होता.
इस बार भगवान को उस पर दया नहीं आई और उन्होंने उसे फिर से चूहा बना दिया और
भगवान उस चूहे से बोले- मैं तुम्हे कुछ भी बना दूँ ,पर तुम रहोगे तो चूहे ही.
शिक्षा/Moral:- दोस्तों, यह कहानी हमें सीख देती है कि जो व्यक्ति अपनी परिस्थितियो से घबरा कर पलायन करता है, उसे चाहे कितनी भी सुख-सुविधाएँ दे दी जाय पर वह हमेशा असंतुष्ट ही रहेगा.
हमें कभी भी अपनी परिस्थितियो से घबरा कर पलायन नहीं करना चाहिए. चाहे दुःख कितना ही बड़ा हो या आपके हालात उस समय आपके पक्ष में न हो. आपको घबराना नहीं चाहिए और उन परिस्थितियो में खुद को मजबूत बना कर उनका सामना करना चाहिए.                                                  2. मुश्किलों से सीखे -।         
7 Best moral stories in hindi for kids
                                                                                                                     एक व्यक्ति अपने गधा को लेकर शहर से लौट रहा था। गलती से वह गधा पैर खिसकने के कारण सीधे एक गहरे गढ़े में गिर गया।
उसे निकलने के लिए उस व्यक्ति ने पूरा कोशिश किया परन्तु वह उस गधे को निकाल नहीं पाया ।
जब उस व्यक्ति को लगा की उसके गधे को उस गढ़े से निकालना अब असंभव हैं तो उसने उसे जिन्दा ही मिटटी से ढक देने का सोचा और वह ऊपर से मिटटी डालने लगा।
बहुत देर तक मिटटी डालने के बाद वह इंसान पास ही अपने घर चले गया ।
पर ढेर सारी मिटटी डालने के कारण वह गधा अपने ऊपर गिरे हुए मिटटी की मदद से धीरे-धीरे उस पर अपना पैर रख-रख कर उस गढ़े के ऊपर जिन्दा चढ़ आया।
अगले दिन जब वह व्यक्ति सुबह उठा तो उसने देखा उसका गधा उसके घर के बहार ही खड़ा था । यह करिश्मा देखकर वह व्यक्ति स्तम्भ रहे गया।
शिक्षा/Moral:- इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी हार नहीं मानना चाहिए और बार-बार कोशिश करते रहना चाहिए।                                                 3. आइसक्रीम की  एक डिश -।         
7 Best moral stories in hindi for kids
                                                                                                         एक बार एक छोटा सा लड़का एक होटल में गया| कुछ ही देर में वहां वेटर आया और पुछा आपको क्या चाहिए सर ? छोटे बच्चे ने उल्टा पुछा!
वैनिला आइसक्रीम कितने रूपए का है? उस वेटर वाले ने जवाब दिया 50 रुपये का।
यह सुन कर उस छोटे लड़के ने अपने जेब में हाँथ डाल कर कुछ निकला और हिसाब किया।
उसने दुबारा पुछा कि संतरा फ्लेवर आइसक्रीम कितने का है। वेटर ने दुबारा जवाब दिया और कहा 35 रुपये का सर।
यह सुने के बाद उस लड़के ने कहा! मेरे लिए एक संतरा फ्लेवर आइसक्रीम ले आईये।
कुछ ही देर में वेटर आइसक्रीम की प्लेट और साथ में बिल लेकर आया और उस बच्चे के टेबल पर रखकर चले गया। उस लड़के ने उस आइसक्रीम को खाने के बाद पैसे दिए और वह चले गया ।
जब वह वेटर वापस आया तो वह दंग रहे गया यह देखकर कि उस लड़के नें खाए हुए आइसक्रीम प्लेट के बगल में उसके लिए 15 रुपय का टिप छोड़ गया था।
शिक्षा/Moral:- उस लड़के के पास 50 रुपये होने पर भी उसने उस वेटर के टिप के बारे में पहले सोचा न की अपने आइसक्रीम के बारे में। उसी प्रकार हमें अपने फायदे के बारे में सोचने से पहले दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए।                 4. बोले हो गए शब्द वापस नहीं आते -।         
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                                                                                          एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा.
संत ने किसान से कहा-” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया.
तब संत ने कहा-” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”
किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा.
तब संत ने उससे कहा- कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है, तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते.
शिक्षा/Moral:- इस कहानी से सीख मिलती है कि कुछ कड़वा बोलने से पहले ये याद रखें कि भला-बुरा कहने के बाद कुछ भी कर के अपने शब्द वापस नहीं लिए जा सकते. हाँ, आप उस व्यक्ति से जाकर क्षमा ज़रूर मांग सकते हैं|
जब आप किसी को बुरा कहते हैं तो वह उसे कष्ट पहुंचाने के लिए होता है पर बाद में वो आप ही को अधिक कष्ट देता है. खुद को कष्ट देने से क्या लाभ, इससे अच्छा तो है की चुप रहा जाए.                                                                                5. अंधविश्वास -।         
7 Best moral stories in hindi for kids
                                                                                                                    एक गाँव में एक आदमी रहता था| वह आदमी पूरे गाँव में अन्धविश्वासी के नाम से मशहूर था| उसकी पत्नी उससे परेशान हो चुकी थी| जब कभी भी उस आदमी की पत्नी से दूध फेल जाता तो वह घबरा जाता और तुरंत मंदिर में जाकर पाठ करने लगता|
कभी उसकी पत्नी से कोई काँच की चीज टूट जाये तो वह आग बबूला हो जाता| उसके इस व्यवहार के चलते पति–पत्नी में दूरियाँ बनती गईं| पत्नी अपना काम करती और उसका काम उसी को करने देती|
उस आदमी को सफाई बहुत पसंद थी मगर दोनों के बीच दूरियों के कारण घर की सफाई भी नहीं हो पा रही थी क्योंकि पत्नी कहती कि अगर मैंने सफाई की और गलती से कोई काँच की चीज मुझसे टूट गई तो आप तो डाँटोगे ही, इसलिए मैं घर की सफाई नहीं कर सकती|
और आदमी बोलता-जिस घर में आदमी सफाई करे, उस घर में लक्ष्मी और खुशियाँ कभी नहीं आ सकतीं| अब सफाई को लेकर भी दोनों के बीच में खूब बहस होती| आखिर में उस आदमी को काम वाली बाई रखनी पड़ी| मगर काम वाली बाई भी उसके अन्धविश्वास के चलते वहाँ ज़्यादा दिन न रह सकी|
एक दिन उसके घर में चोरी हो गई|
पत्नी के पुलिस को फ़ोन करने को कहने पर वह बोला-“रूको। जब कभी भी घर में कोई बुरा काम हो जाये तो आधे या एक घंटे बाद ही कोई दूसरा काम करना चाहिए|”
पत्नी अपना माथा पकड़कर वहीं बैठ गई| उसकी पत्नी रोज यही सोचती कि कब उसके आदमी का अन्धविश्वास छूटेगा| पर कहते हैं कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं| एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि उस आदमी का सारा अन्धविश्वास दूर हो गया|
हुआ कुछ यूँ कि कुछ दिनों से उस आदमी के घर के पीछे स्थित नारियल के झुरमुट से एक बच्चे की रोने की आवाज आती थी| इससे वह बहुत डर जाता| उसकी पत्नी कहती कि चलो देख के आते हैं कि आखिर क्या है वहाँ पर।
पर वह उसे डाँट कर घर से बाहर निकलने ही नहीं देता| एक दिन वह एक तांत्रिक को अपने घर पे ले आया| तांत्रिक ने घर पे आते ही कहा कि इस घर पे और इसके आस-पास काली शक्तियों का बसेरा है| वह आदमी डर गया|
उसने बोला- “बाबा! अब क्या करें?” बाबा ने कहा कि एक हवन करना पड़ेगा और इसमें 21 हजार रूपये खर्चा होगा| उसकी पत्नी ने उसे रोका पर वह नहीं माना| हवन होने के बाद भी कुछ न हुआ|
एक दिन उसके घर के पास से राजू निकला जो उन नारियल के पेड़ों से नारियल तोड़ता और उन्हें बाज़ार में बेचता था| वह बहुत परेशान दिख रहा था तो उस आदमी ने उससे कारण पूछा|
राजू बोला- “मेरा मोबाइल नारियल के पेड़ों के पास कहीं गिर गया था, मिल ही नहीं रहा|”
वह आदमी बोला- “राजू! वहाँ मत जाया कर। वहाँ काली शक्तियों का राज है। वहाँ रोज़ एक बच्चे की रोने की आवाज आती है|”
यह सुनकर राजू जोर–जोर से हँसने लगा और बोला- “साब, आप कितने पागल हो। वह आवाज तो मेरे मोबाइल में से आती है। मैंने अपने मोबाइल में बच्चे की रोने की आवाज सेट की है|”
आस पास खड़े लोग भी उस आदमी पर हँसने लगे और उस आदमी की गर्दन शर्म से नीचे झुक गई| ।                                   6. एहसान - ।       
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                                                                                                                                एक बहेलिया था। एक बार जंगल में उसने चिड़िया फंसाने के लिए अपना जाल फैलाया। थोड़ी देर बाद ही एक उकाब उसके जाल में फंस गया।
वह उसे घर लाया और उसके पंख काट दिए। अब उकाब उड़ नहीं सकता था, बस उछल उछलकर घर के आस-पास ही घूमता रहता।
उस बहेलिए के घर के पास ही एक शिकारी रहता था। उकाब की यह हालत देखकर उससे सहन नहीं हुआ।
वह बहेलिए के पास गया और कहा-"मित्र, जहां तक मुझे मालूम है, तुम्हारे पास एक उकाब है, जिसके तुमने पंख काट दिए हैं। उकाब तो शिकारी पक्षी है।
छोटे-छोटे जानवर खा कर अपना भरण-पोषण करता है। इसके लिए उसका उड़ना जरूरी है। मगर उसके पंख काटकर तुमने उसे अपंग बना दिया है। फिर भी क्या तुम उसे मुझे बेच दोगे?"
बहेलिए के लिए उकाब कोई काम का पक्षी तो था नहीं, अतः उसने उस शिकारी की बात मान ली और कुछ पैसों के बदले उकाब उसे दे दिया।
शिकारी उकाब को अपने घर ले आया और उसकी दवा-दारू करने लगा। दो माह में उकाब के नए पंख निकल आए। वे पहले जैसे ही बड़े थे। अब वह उड़ सकता था।
जब शिकारी को यह बात समझ में आ गई तो उसने उकाब को खुले आकाश में छोड़ दिया। उकाब ऊंचे आकाश में उड़ गया। शिकारी यह सब देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। उकाब भी बहुत प्रसन्न था और शिकारी बहुत कृतज्ञ था।
अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए उकाब एक खरगोश मारकर शिकारी के पास लाया।
एक लोमड़ी, जो यह सब देख रही थी,
लोमड़ी उकाब से बोली-"मित्र! जो तुम्हें हानि नहीं पहुंचा सकता उसे प्रसन्न करने से क्या लाभ?"
इसके उत्तर में उकाब ने कहा-"व्यक्ति को हर उस व्यक्ति का एहसान मानना चाहिए, जिसने उसकी सहायता की हो और ऐेसे व्यक्तियों से सावधान रहना चाहिए जो हानि पहुंचा सकते हों।"
शिक्षा/Moral:-व्यक्ति को सदा सहायता करने वाले का कृतज्ञ रहना चाहिए।                                                          7. बगल में छोरा नगर ढिंढोरा -।       
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                                                                                                          एक पंडित जी थे। उनके पास एक मोटी ताजी दुधारू गाय थी। यह गाय किसी ने उन्हें दान में दी थी। गाय के कारण घर में दूध, घी, दही की कमी नहीं होती थी। खा पीकर पंडित जी मोटे तगड़े होते जा रहे थे।
एक शाम की बात है, पंडित जी जैसे ही दूध दुहने गोशाला पहुंचे तो गाय वहां से गायब मिली। खूंटा भी उखड़ा हुआ था। पंडित जी की जान सूख गई।
उन्होंने सोचा-”हो न हो गाय कहीं निकल भागी है।“ गाय चूंकि उन्हें बहुत प्रिय थी सो वह फौरन ढूंढ़ने निकल पड़े।
थोड़ी दूर पर पंडित जी को एक गाय चरती हुई दिखाई दी। वह खुश हो गए। लेकिन सांझ के झुरमुट में यह नहीं जान पाए कि जिसे वह अपनी गाय समझ बैठे हैं, वह पड़ोसी का मरखना सांड़ है।
उन्होंने लपककर ज्यों ही रस्सी थामी कि सांड़ भड़क उठा। जब तक सारी बात समझ में आती, देर हो चुकी थी। सांड़ हुंकारता हुआ उनके पीछे दौड़ पड़ा। थुलथुल शरीर वाले पंडित जी हांफते हांफते गिरते पड़ते भाग खड़े हुए।
भागते भागते उनका दम निकला जा रहा था और सांड़ था कि हार मानने को तैयार ही नहीं था। आखिरकार एक गड्डा देखकर पंडित जी उसमें धप से कूद गए। सांड़ फिर भी न माना। पीछे पीछे वह भी गड्डे में उतर पड़ा।
पंडित जी फिर भागे। अबकी बार उन्हें भूसे का एक ढेर दिखा, पंडित जी उस पर कूद गए और दम साधकर पड़े रहे। सांड़ ने भूसे के दो एक चक्कर लगाए और थोड़ी देर ठहर कर इधर उधर उन्हें तलाशता रहा, फिर चला गया।
भूसे के ढेर से पंडित जी वापस आए तो उनका रूप बदल चुका था। पूरे शरीर पर भूसा चिपक गया था। वह किसी दूसरे ग्रह के जीव नजर आ रहे थे। तभी उधर से गुजरते हुए एक आदमी की नजर उन पर पड़ी। वह डरकर चीख उठा।
उसकी चीख सुनकर दस बीस आदमी मदद को आ जुटे। अब आगे आगे पंडित जी और पीछे पीछे सारे लोग।
वह चीखते रहे-”भाइयों, मैं हूं पंडित जी….“ पर लोगों ने एक न सुनी।
आखिरकार बचने का एकमात्र उपाय देखकर पंडित जी एक तालाब में कूद पड़े, तन से भूसा छूटा तो लोग हैरान रह गए। जब सारे लोगों को उनकी रामकहानी मालूम हुई तो सारे वापस अपने घरों को लौट गए।
पंडित जी गाय की खोज में हांफते हांफते आगे बढ़े। गांव के बाहर आम के बाग थे। गाय चरती हुई अक्सर उधर चली जाती थी। पंडित जीम न में एक आशा की किरण लिए आगे बढ़े। उन दिनों आम पकने लगे थे। रखवाले बागों में झोंपड़ी बनाकर रखवाली करते थे। जब उन्होंने चुपके चुपके किसी को
बाग में घुसते देखा तो लाठी लेकर शोर मचाते हुए उस और दौड़ पड़े जिस ओर से पंडित जी आ रहे थे। पंडित जी के होश उड़ गए। वह सिर पर पैर रखकर भाग खड़े हुए।
भागते भागते वह एक खेत में पहुंचे। खेत में खरबूजे और ककड़ियां बोई थीं। खेत के रखवाले ने गोल मटोल पंडित जी को देखा तो समझा कोई जानवर घुस आया है। वे लाठियां और जलती मशालें लेकर उनके पीछे लपक लिए। अब पंडित जी का धैर्य टूट गया। इस बार भागे तो सीधा घर जाकर रूके।
उनकी हालत देखकर पंडिताइन ने पूछा-”क्यों जी कहां से आ रहे हो?“
पंडित जी हांफते हुए बोले- ”मैं गाय की खोज में दुबला हो गया और तुम पूछती हो कि कहां से आ रहे हो?“
"गाय की खोज? गाय तो घर के पीछे बंधी है। गौशाला का खूंटा उखड़ गया था। इसलिए मैंने गाय को घर के पीछे ले जाकर बांध दिया था।“
पंडिताइन की बात सुनकर पंडित जी ने सिर पीट लिया।                                                                                             आशा है आपको 7 सबसे अच्छे प्रेरणादायक कहानियां  (7 Best moral stories in hindi )   पसंद आई धन्यवाद ।

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